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$USDC INFRASTRUCTURE PLAY: TIGER GLOBAL BACKS CLEARING BANK WITH $180M 🦈 📌 While everyone's glued to retail price action, the real battle is being fought in the settlement layer. Augustus just raised $180M at a $1B valuation to build a licensed Federal Clearing Bank — targeting the 2-day settlement bottleneck that's been crushing cross-border payments for decades. 🏦 🦈 This is Tiger Global, Nubank, Circle, and Deel's founders putting chips on the table. They're not betting on a token — they're betting on the rails that will move billions in stablecoin volume 24/7. The correspondent banking system is slow, closed on weekends, and ripe for disruption. 💡 💬 When the smart money funds the plumbing instead of the hype, what does that tell you about where this industry is heading? 👇 ⚠️ Not financial advice. Always manage your risk. 🛡️ 🏷️ #USDC #InstitutionalAdoption #Stablecoins #CryptoInfrastructure #BlockchainBanking 🦈 🌊
$USDC INFRASTRUCTURE PLAY: TIGER GLOBAL BACKS CLEARING BANK WITH $180M 🦈

📌 While everyone's glued to retail price action, the real battle is being fought in the settlement layer. Augustus just raised $180M at a $1B valuation to build a licensed Federal Clearing Bank — targeting the 2-day settlement bottleneck that's been crushing cross-border payments for decades. 🏦

🦈 This is Tiger Global, Nubank, Circle, and Deel's founders putting chips on the table. They're not betting on a token — they're betting on the rails that will move billions in stablecoin volume 24/7. The correspondent banking system is slow, closed on weekends, and ripe for disruption. 💡

💬 When the smart money funds the plumbing instead of the hype, what does that tell you about where this industry is heading? 👇

⚠️ Not financial advice. Always manage your risk. 🛡️

🏷️ #USDC #InstitutionalAdoption #Stablecoins #CryptoInfrastructure #BlockchainBanking

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RBI Launch Pilot Deposit Tokenisation से बैंकिंग सिस्टम होगा और भी स्मार्टRBI Launch Pilot Deposit Tokenisation, भारत में डिजिटल बैंकिंग का नया दौर शुरू भारत की बैंकिंग व्यवस्था एक नई दिशा में कदम बढ़ाने जा रही है। RBI Launch Pilot Deposit Tokenisation प्रोग्राम के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) 8 अक्टूबर 2025 से डिपॉजिट टोकनाइजेशन का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा। यह पहल देश के CBDC (Central Bank Digital Currency) यानी e-Rupee के Wholesale मॉडल पर बेस्ड होगी। इसका उद्देश्य बैंकिंग ट्रांजैक्शंस को और तेज़, सस्ता और सुरक्षित बनाना ह Source: यह इमेज Bitinning की X पोस्ट से ली गई है। जिसकी लिंक यहां दी गई है। Deposit Tokenisation क्या है  डिपॉजिट टोकनाइजेशन का मतलब है बैंक में रखे पैसों को डिजिटल टोकन के रूप में बदलना। हर टोकन एक यूनिट बैंक डिपॉजिट को रिप्रेजेन्टेशन करेगा (1 टोकन = 1 यूनिट डिपॉजिट)। इससे बैंकिंग सिस्टम में पैसे का ट्रांसफर और सेटलमेंट ज्यादा सरल और ट्रांसपेरेंट हो जाएगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई ग्राहक बैंक में ₹100 जमा करता है, तो बैंक उसी वैल्यू के डिजिटल टोकन जारी कर सकता है, जिसे अन्य प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से ट्रांसफर किया जा सकेगा। यह मॉडल ट्रेडिशनल बैंकिंग की तुलना में ट्रांजैक्शंस को अधिक तेज़ और सस्ता बनाता है क्योंकि यह Blockchain Technology जैसी सुरक्षित टेक्नोलॉजी पर आधारित है। CBDC Wholesale को क्यों बनाया गया बेस लेयर RBI ने इस RBI Launch Pilot Deposit Tokenisation को भारत के Wholesale CBDC (e₹-W) पर बनाया है। Wholesale CBDC मुख्य रूप से इंटरबैंक या इंस्टीट्यूशनल सेटलमेंट्स के लिए बनाया गया था जैसे कि गवर्नमेंट सिक्योरिटीज मार्केट में ट्रांजैक्शन। इस टेक्नोलॉजी को बेस लेयर बनाने से डिपॉजिट टोकन सीधे केंद्रीय बैंक (RBI) से जुड़ जाएंगे, जिससे भरोसा और सुरक्षा दोनों बनी रहेंगी। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि हर टोकन का मूल्य सेंट्रल बैंक द्वारा कंट्रोल किया जा सके, जिससे फ्रॉड और रिस्क का खतरा कम होगा। ताकि RBI Launch Pilot Deposit Tokenisation को पहले बैंकों और संस्थानों के लिए टेस्ट किया जा सके। जो भविष्य में आम लोगों तक भी बढ़ाया जा सकता है। भारत में CBDC ट्रायल्स, शुरुआत से अब तक भारत में डिजिटल करेंसी की शुरुआत नवंबर 2022 में शुरू हुई थी। उस समय Wholesale CBDC पायलट का उद्देश्य गवर्नमेंट सिक्योरिटीज मार्केट में सेटलमेंट को आसान बनाना था। इसके बाद दिसंबर 2022 में Retail CBDC (e₹-R) लॉन्च किया गया, जिसमें आम सिटीजन और ट्रेडर्स शामिल थे। मार्च 2024 तक रिटेल CBDC का उपयोग तेजी से बढ़ा ₹6 करोड़ से बढ़कर ₹234 करोड़ तक पहुँच गया, यानी लगभग 39 गुना की बढ़ोतरी हुई। हालांकि Wholesale CBDC का उपयोग कम हो गया था, लेकिन अब Deposit Tokenisation पहल इसे फिर से मजबूत करने की दिशा में बढ़ाया कदम है। Tokenised Deposit सिस्टम कैसे काम करेगा इस प्रोसेस में ग्राहक अपने बैंक में पैसे जमा करता है और बैंक या ऑथॉराइज़्ड आर्गेनाइजेशन उसके बराबर डिजिटल टोकन जारी करती है। ये टोकन सुरक्षित ब्लॉकचेन नेटवर्क पर दर्ज होते हैं। ग्राहक अपने असली पैसे बैंक में सुरक्षित रखते हुए, इन डिजिटल टोकन को आसानी से ट्रांसफर या एक्सचेंज कर सकता है। इससे ट्रांज़ैक्शन तेज़, सुरक्षित और कम कॉस्ट वाला बन जाता है, साथ ही बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ती है और निवेश में ट्रांसपेरेंसी आती है। RBI और बैंकिंग सेक्टर पर CBDC का असर RBI Launch Pilot Deposit Tokenisation से भारत के $3.5 ट्रिलियन बैंकिंग सेक्टर में नई स्पीड आ सकती है। यह प्रोग्राम ट्रांज़ैक्शन को तेज़, कॉस्ट को कम और पेमेंट्स को सुरक्षित बनाता है। इसके जरिए मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स और बैंक डिपॉजिट्स के बीच डिजिटल कनेक्शन आसान होगा। यह सिस्टम प्राइवेट या परमीशन ब्लॉकचेन पर काम करेगा, यानी केवल चुनिंदा बैंक और आर्गेनाइजेशन ही इसका इस्तेमाल कर पाएंगी। इसका मकसद नियमों का पालन और जोखिम को कंट्रोल रखना है। भविष्य की बैंकिंग के लिए डिजिटल कदम यह पायलट डिजिटल इंडिया में बैंकिंग बदलाव का महत्वपूर्ण कदम है। अगर यह सफल रहता है, तो भविष्य में Retail Users भी डिपॉजिट टोकन का इस्तेमाल कर पाएंगे। इससे ट्रांज़ैक्शन तेज़, सुरक्षित और ट्रांसपेरेंट होंगे और बैंकिंग सिस्टम में निवेश और फाइनेंशियल ऑपरेशन्स को नई स्पीड और सुविधा मिलेगी। हाल ही में Minister of Commerce and Industry Piyush Goyal ने जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है की, भारत जल्द ही अपना खुद का RBI-Backed डिजिटल करेंसी लॉन्च करने जा रहा है, जो देश के मोनेटरी सिस्टम में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है। Reserve Bank of India (RBI) की गारंटी के साथ आने वाली इस डिजिटल करेंसी से देश में ट्रांज़ैक्शन तेज़, सुरक्षित और ट्रांसपेरेंट बनेंगे। कन्क्लूजन RBI Launch Pilot Deposit Tokenisation भारत की बैंकिंग सिस्टम में एक बड़ा कदम है। इस पहल के तहत बैंक डिपॉजिट्स को डिजिटल टोकन्स में बदला जाएगा, जिससे ट्रांज़ैक्शन तेज़, सुरक्षित और सस्ता होगा। यूजर्स अपने पैसे सुरक्षित रखते हुए इन टोकन्स को आसानी से ट्रांसफर या एक्सचेंज कर सकेंगे। यह प्रयोग बैंकिंग में ट्रांसपेरेंसी और भरोसे को बढ़ाएगा और भविष्य में रिटेल यूजर्स तक भी पहुँच सकता है। RBI का यह कदम भारत की डिजिटल इकोनॉमी को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। To know More Visit- cryptohindinews #CryptoHindiNews #Hindi #RBIDepositTokenisation #DigitalBankingIndia #BlockchainBanking

RBI Launch Pilot Deposit Tokenisation से बैंकिंग सिस्टम होगा और भी स्मार्ट

RBI Launch Pilot Deposit Tokenisation, भारत में डिजिटल बैंकिंग का नया दौर शुरू
भारत की बैंकिंग व्यवस्था एक नई दिशा में कदम बढ़ाने जा रही है। RBI Launch Pilot Deposit Tokenisation प्रोग्राम के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) 8 अक्टूबर 2025 से डिपॉजिट टोकनाइजेशन का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा। यह पहल देश के CBDC (Central Bank Digital Currency) यानी e-Rupee के Wholesale मॉडल पर बेस्ड होगी। इसका उद्देश्य बैंकिंग ट्रांजैक्शंस को और तेज़, सस्ता और सुरक्षित बनाना ह
Source: यह इमेज Bitinning की X पोस्ट से ली गई है। जिसकी लिंक यहां दी गई है।
Deposit Tokenisation क्या है
डिपॉजिट टोकनाइजेशन का मतलब है बैंक में रखे पैसों को डिजिटल टोकन के रूप में बदलना। हर टोकन एक यूनिट बैंक डिपॉजिट को रिप्रेजेन्टेशन करेगा (1 टोकन = 1 यूनिट डिपॉजिट)। इससे बैंकिंग सिस्टम में पैसे का ट्रांसफर और सेटलमेंट ज्यादा सरल और ट्रांसपेरेंट हो जाएगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई ग्राहक बैंक में ₹100 जमा करता है, तो बैंक उसी वैल्यू के डिजिटल टोकन जारी कर सकता है, जिसे अन्य प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से ट्रांसफर किया जा सकेगा।
यह मॉडल ट्रेडिशनल बैंकिंग की तुलना में ट्रांजैक्शंस को अधिक तेज़ और सस्ता बनाता है क्योंकि यह Blockchain Technology जैसी सुरक्षित टेक्नोलॉजी पर आधारित है।
CBDC Wholesale को क्यों बनाया गया बेस लेयर
RBI ने इस RBI Launch Pilot Deposit Tokenisation को भारत के Wholesale CBDC (e₹-W) पर बनाया है। Wholesale CBDC मुख्य रूप से इंटरबैंक या इंस्टीट्यूशनल सेटलमेंट्स के लिए बनाया गया था जैसे कि गवर्नमेंट सिक्योरिटीज मार्केट में ट्रांजैक्शन। इस टेक्नोलॉजी को बेस लेयर बनाने से डिपॉजिट टोकन सीधे केंद्रीय बैंक (RBI) से जुड़ जाएंगे, जिससे भरोसा और सुरक्षा दोनों बनी रहेंगी।
इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि हर टोकन का मूल्य सेंट्रल बैंक द्वारा कंट्रोल किया जा सके, जिससे फ्रॉड और रिस्क का खतरा कम होगा। ताकि RBI Launch Pilot Deposit Tokenisation को पहले बैंकों और संस्थानों के लिए टेस्ट किया जा सके। जो भविष्य में आम लोगों तक भी बढ़ाया जा सकता है।
भारत में CBDC ट्रायल्स, शुरुआत से अब तक
भारत में डिजिटल करेंसी की शुरुआत नवंबर 2022 में शुरू हुई थी। उस समय Wholesale CBDC पायलट का उद्देश्य गवर्नमेंट सिक्योरिटीज मार्केट में सेटलमेंट को आसान बनाना था। इसके बाद दिसंबर 2022 में Retail CBDC (e₹-R) लॉन्च किया गया, जिसमें आम सिटीजन और ट्रेडर्स शामिल थे।
मार्च 2024 तक रिटेल CBDC का उपयोग तेजी से बढ़ा ₹6 करोड़ से बढ़कर ₹234 करोड़ तक पहुँच गया, यानी लगभग 39 गुना की बढ़ोतरी हुई। हालांकि Wholesale CBDC का उपयोग कम हो गया था, लेकिन अब Deposit Tokenisation पहल इसे फिर से मजबूत करने की दिशा में बढ़ाया कदम है।
Tokenised Deposit सिस्टम कैसे काम करेगा
इस प्रोसेस में ग्राहक अपने बैंक में पैसे जमा करता है और बैंक या ऑथॉराइज़्ड आर्गेनाइजेशन उसके बराबर डिजिटल टोकन जारी करती है। ये टोकन सुरक्षित ब्लॉकचेन नेटवर्क पर दर्ज होते हैं। ग्राहक अपने असली पैसे बैंक में सुरक्षित रखते हुए, इन डिजिटल टोकन को आसानी से ट्रांसफर या एक्सचेंज कर सकता है। इससे ट्रांज़ैक्शन तेज़, सुरक्षित और कम कॉस्ट वाला बन जाता है, साथ ही बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ती है और निवेश में ट्रांसपेरेंसी आती है।
RBI और बैंकिंग सेक्टर पर CBDC का असर
RBI Launch Pilot Deposit Tokenisation से भारत के $3.5 ट्रिलियन बैंकिंग सेक्टर में नई स्पीड आ सकती है। यह प्रोग्राम ट्रांज़ैक्शन को तेज़, कॉस्ट को कम और पेमेंट्स को सुरक्षित बनाता है। इसके जरिए मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स और बैंक डिपॉजिट्स के बीच डिजिटल कनेक्शन आसान होगा। यह सिस्टम प्राइवेट या परमीशन ब्लॉकचेन पर काम करेगा, यानी केवल चुनिंदा बैंक और आर्गेनाइजेशन ही इसका इस्तेमाल कर पाएंगी। इसका मकसद नियमों का पालन और जोखिम को कंट्रोल रखना है।
भविष्य की बैंकिंग के लिए डिजिटल कदम
यह पायलट डिजिटल इंडिया में बैंकिंग बदलाव का महत्वपूर्ण कदम है। अगर यह सफल रहता है, तो भविष्य में Retail Users भी डिपॉजिट टोकन का इस्तेमाल कर पाएंगे। इससे ट्रांज़ैक्शन तेज़, सुरक्षित और ट्रांसपेरेंट होंगे और बैंकिंग सिस्टम में निवेश और फाइनेंशियल ऑपरेशन्स को नई स्पीड और सुविधा मिलेगी।
हाल ही में Minister of Commerce and Industry Piyush Goyal ने जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है की, भारत जल्द ही अपना खुद का RBI-Backed डिजिटल करेंसी लॉन्च करने जा रहा है, जो देश के मोनेटरी सिस्टम में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है। Reserve Bank of India (RBI) की गारंटी के साथ आने वाली इस डिजिटल करेंसी से देश में ट्रांज़ैक्शन तेज़, सुरक्षित और ट्रांसपेरेंट बनेंगे।
कन्क्लूजन
RBI Launch Pilot Deposit Tokenisation भारत की बैंकिंग सिस्टम में एक बड़ा कदम है। इस पहल के तहत बैंक डिपॉजिट्स को डिजिटल टोकन्स में बदला जाएगा, जिससे ट्रांज़ैक्शन तेज़, सुरक्षित और सस्ता होगा। यूजर्स अपने पैसे सुरक्षित रखते हुए इन टोकन्स को आसानी से ट्रांसफर या एक्सचेंज कर सकेंगे। यह प्रयोग बैंकिंग में ट्रांसपेरेंसी और भरोसे को बढ़ाएगा और भविष्य में रिटेल यूजर्स तक भी पहुँच सकता है। RBI का यह कदम भारत की डिजिटल इकोनॉमी को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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