डिजिटल गोल्ड (Digital Gold): बिटकॉइन की कुल सप्लाई सीमित है (केवल 2.1 करोड़ बिटकॉइन ही कभी बन सकते हैं)। पारंपरिक मुद्राओं (Fiat Currencies) की तरह सरकारें इसे अपनी मर्जी से छापकर इसकी वैल्यू को कम नहीं कर सकतीं। यही वजह है कि इसे डिजिटल युग का 'सोना' कहा जाता है, जो महंगाई और मुद्रास्फीति (Inflation) के खिलाफ एक मजबूत बचाव (Hedge) प्रदान करता है।

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